रावल जैत्र सिंह (1213-1253 ईसवी)रावल जैत्रसिंह का जीवन एवं कार्य तीन कारणों से विशेष रहा। प्रथम, रावल जैत्र सिंह तेरहवीं शताब्दी में अफगानों एवं तुर्क आक्रमणकारियों के विरुद्ध हिंदू संघां में एक महत्त्वपूर्ण कड़ी रहे।बाप्पा रावल, खुमाण तथा शक्ति कुमार की इस्लामी आक्रांताओं के विरुद्ध विजय-यात्राओं के पश्चात् रावल जैत्र सिंह ने इस संघर्ष को जीवित रखा।द्वितीय, जैत्र सिंह की विभिन्न युद्धों में विजय के परिणाम स्वरूप दिल्ली सल्तनत नाम का झूठ पुनः खुलकर सामने आ जाता है। पराजित मुसलमान लुटेरों को सुल्तान बताने में इस देश के इतिहासकारों को लज्जा भी नहीं आई।इनमें 1224 से 1234 ईसवी तक शमसुद्दीन