।वेदांत 2.0 लाइफ़": तुरीय-आधारित '0 बोध' को लाइफ़–साइंस और कॉन्शसनेस–स्टडीज़ के एकीकृत फ्रेमवर्क के रूप में प्रस्तावसार (Abstract) – "वेदांत 2.0 लाइफ़" नामक एक समेकित फ्रेमवर्क प्रस्तुत करता है, जो उपनिषदिक तुरीय–दृष्टि और आधुनिक जीवन-विज्ञान व संज्ञान-विज्ञान के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास है। माण्डूक्य उपनिषद में वर्णित तुरीय को जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति से परे, परंतु उन्हें धारण करने वाली साक्षी–चेतना के रूप में समझा गया है; आधुनिक कॉन्शसनेस स्टडीज़ में इसे "background field of awareness" या "ever-present witness" के रूप में व्याख्यायित किया जा सकता हैवेदांत 2.0 लाइफ़ का केंद्रीय सिद्धांत "0 बोध" है – एक ऐसी