Devil की दास्तान - 25

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(सिमरन धीरे-धीरे आँखें खोलती है।वो करवट बदलती है — तभी देखती है, सामने करण खड़ा है।उसकी लाल आँखें हल्के ग़ुस्से से चमक रही हैं।हाथ में एक छोटा बैग है — जैसे उसे बाहर भेजना चाहता हो।)करण (ठंडे स्वर में) बोला - “उठो... और निकलो यहाँ से।”(सिमरन घबराकर उठने की कोशिश करती है, लेकिन जैसे ही खड़ी होती है —वो अचानक ‘धड़ाम’ से ज़मीन पर गिर पड़ती है।)(उसके मुँह से दर्द भरी सिसकी निकलती है।)सिमरन (कराहते हुए) बोली - “आह... मेरी... मेरी कमर... हाथ... पैर... सब दुख रहे हैं...”(करण पहले तो चुप रहता है, लेकिन जब उसकी नज़र सिमरन पर पड़ती है —वो