**पूর্ণ दर्शन‑विज्ञान:“ईश्वर पाना” की मानसिकता पर वेदान्तीय और समाज‑मनोवैज्ञानिक समालोचना**प्रस्तावनासमकालीन धार्मिक विमर्श में “ईश्वर को पाना”, “भगवान की प्राप्ति करना”, “मुक्ति हासिल करना” और “आनंद पाना” जैसे वाक्यांश अत्यन्त सामान्य हो चुके हैं। यह भाषा गहरे स्तर पर आधुनिक achievement‑मानसिकता को प्रतिबिम्बित करती है, जिसमें आध्यात्मिकता को भी किसी बाह्य लक्ष्य, पद या उपलब्धि की तरह प्रस्तुत किया जाता है। इस लेख का उद्देश्य इस उपलब्धि‑केंद्रित भाषा और मानसिकता का वेदान्तीय, दार्शनिक, और समाज‑मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य से आलोचनात्मक परीक्षण करना है।अद्वैत वेदान्त की मूल स्थापना यह है कि आत्मन् और ब्रह्म की एकता नित्य‑सिद्ध है; मोक्ष कोई नया तत्त्व प्राप्त करना