------------------------------ अध्याय 5: क्रोध और अहंकार (भीतर का ज्वालामुखी: आत्म-रक्षा की नौटंकी या कमजोरी का सबूत?)------------------------------ भाग 1: तुम्हारा गुस्सा कोई ताकत नहीं, तुम्हारी लाचारी का सर्टिफिकेट हैआइए आज तुम्हारे भीतर बैठे उस सबसे हिंसक और बदसूरत राक्षस का मुखौटा उतारते हैं जिसे तुम 'क्रोध' (Anger) कहते हो, और जिसके पीछे तुम्हारा 'अहंकार' (Ego) हाथ में ढाल लिए खड़ा है।जब तुम्हें गुस्सा आता है, तो तुम बड़ी शान से कहते हो, "मुझे गलत बात बर्दाश्त नहीं होती", "मेरा स्वाभिमान बहुत ऊँचा है", "अगर कोई मेरी मर्यादा को ठेस पहुँचाएगा, तो मैं उसे उसकी औकात दिखा दूँगा।" तुम अपने गुस्से को 'मर्दानगी',