श्री: संघर्ष एवं प्रेम - पाठ 4

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फ्लैश बैक end वर्तमान में ,श्री सीता जी से बात कर रही थी । सीता जी ने श्री से पूछा कि अब और भी ज्यादा भक्ति करने की क्या आवश्यकता है पिछली बार भी मैने तुम्हे समझाया था फिर फिर भी तुम्हारा ये रूप मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।श्री ने उनकी बात सुन कर कहा। आंटी आप मेरी मां जैसे है । जिस प्रकार वो मुझे समझाती है उसी प्रकार आपने भी मुझे समझाया। मेरे हित चाहने की इच्छा से आपने मुझे ये सब समझाया था। लेकिन मेरे लिए तो मेरा हित बस नारायण भक्ति में ही है ।अब मैने