विश्राम के बाद सभी लोगों ने हरिद्वार में गंगा स्नान और गंगा आरती देखने जाने का निश्चय किया।सबकी बात सुन श्री गुरुदेव के पास आज्ञा लेने गईगुरुदेव ध्यान में लीन थे सार्थक गुरुदेव की सेवा में लीन था ....वही?....... श्री उनके समक्ष हाथ जोर के उनके पास बैठ गई गुरुदेव को आभास हुआ उन्होंने नेत्र खोले श्री — गुरुदेव हम सब गंगा स्नान और गंगा आरती के लिए जाना चाहते है आपकी आज्ञा हो तो ....गुरुदेव — अवश्य पुत्री आप सब जाइएगुरुदेव सार्थक की तरफ देखते हुए –सार्थक पुत्र आप भी राम जी और कृष्ण जी के परिवार वालों के साथ जाए ।