ऋग्वेद सूक्ति (70) की व्याख्या "प्रेहि प्रेहि पथिभि: पूर्व्येभि:"ऋग्वेद --10/14/7भावार्थ --श्रेष्ठ मार्ग पर आगे बढ़ो।इसका पूरा मंत्र --प्रेहि प्रेहि पथिभिः पूर्व्येभिर्यत्रा नः पूर्वे पितरः परेयुः।उभा राजाना स्वधया मदन्ता यमं पश्यासि वरुणं च देवम्॥ (ऋग्वेद 10.14.7) शब्दार्थप्रेहि प्रेहि — आगे बढ़ो, चलो।पथिभिः पूर्व्येभिः — प्राचीन, श्रेष्ठ मार्गों से।यत्र — जहाँ।पूर्वे पितरः — हमारे पूर्वज।परेयुः — गए हैं।उभा राजाना — दोनों महान शासक।यमम् — यम।वरुणं च देवम् — और देव वरुण को।भावार्थ"हे जीव! उन प्राचीन और श्रेष्ठ मार्गों पर आगे बढ़ो जिन पर हमारे पूर्वज चले थे। वहाँ तुम यम और वरुण इन दोनों महान दिव्य शक्तियों का दर्शन करोगे।" प्रेरणात्मक अर्थवैदिक व्याख्याकारों ने इस