ऋग्वेद सूक्ति (71) की व्याख्याबृहस्पते अति यदर्यो अराति:ऋगुवेद--2/23/1भावार्थ--हे ईश्वर ! हमें श्रेष्ठ बुद्धि प्रदान करें।आपने जो मंत्र उद्धृत किया है—बृहस्पते अति यदर्यो अरातिर्द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषुयद्दीदयच्छवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम् ॥ — ऋग्वेद 2.23.1का सामान्य अर्थ वास्तव में बृहस्पति (ब्रह्मणस्पति) से उत्तम बुद्धि, प्रेरणा, शक्ति और कल्याणकारी संपदा की प्रार्थना है।पदानुसार अर्थबृहस्पते — हे बृहस्पति (प्रार्थना, ज्ञान और वाणी के अधिष्ठाता)!अति यत् अर्यः अरातिः — जो शत्रुता, दरिद्रता या बाधाओं को दूर करते हैं।द्युमत् विभाति — जो तेजस्वी होकर प्रकाशित होते हैं।क्रतुमत् जनेषु — बुद्धिमान और कर्मशील लोगों में प्रेरणा देते हैं।तत् अस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम् — वह विविध कल्याण, ज्ञान