रात के ठीक 11:57 बजे थे।मुंबई शहर बारिश में डूबा हुआ था।अनिकेत अपनी कार पार्क करके अपार्टमेंट की ओर बढ़ रहा था। जैसे ही उसने मुख्य दरवाज़ा खोला, उसकी नज़र ज़मीन पर पड़े एक सफेद लिफाफे पर गई।लिफाफे पर न कोई पता था, न कोई टिकट, न भेजने वाले का नाम।सिर्फ़ लाल स्याही से एक वाक्य लिखा था—"अगर ज़िंदा रहना चाहते हो... तो इसे 30 दिन तक मत खोलना।"अनिकेत मुस्कुराया।"आजकल लोग भी कैसी-कैसी प्रैंक करते हैं..."वह लिफाफा उठाकर अपने फ्लैट में चला गया।उसने उसे ड्रॉअर में रख दिया और सो गया।लेकिन उसी रात...ठीक 3:00 बजे...उसकी नींद अचानक खुल गई।पूरा कमरा