बंद लिफाफा - 2

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बेसमेंट का भारी लोहे का दरवाज़ा अपने-आप बंद हो चुका था।धड़ाम...!आवाज़ इतनी तेज़ थी कि पूरी इमारत काँप उठी।अनिकेत ने घबराकर दरवाज़ा खोलने की कोशिश की।लेकिन दरवाज़ा बाहर से लॉक हो चुका था।चारों तरफ़ घना अँधेरा...सिर्फ़ इंस्पेक्टर राघव की टॉर्च की हल्की रोशनी।और उसी रोशनी में...दीवार पर लाल रंग से लिखा था—"WELCOME, ANIKET"अनिकेत की धड़कनें तेज़ हो गईं।"यहाँ मेरा नाम किसने लिखा?"तभी...अँधेरे में किसी के ताली बजाने की आवाज़ आई।ठक... ठक... ठक...फिर वही भारी आवाज़..."तुम ठीक समय पर आए हो..."राघव ने तुरंत अपनी पिस्तौल निकाल ली।"कौन है? सामने आओ!"लेकिन कोई दिखाई नहीं दिया।कुछ सेकंड बाद...बेसमेंट की पुरानी ट्यूब लाइट अपने-आप