बंद लिफाफा - 3

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अनिकेत के हाथ काँप रहे थे।मोबाइल की स्क्रीन पर अब भी वही संदेश चमक रहा था—"पीछे मुड़कर मत देखना..."लेकिन वह पीछे मुड़ चुका था।अँधेरे में...करीब पचास कदम दूर...एक आदमी खड़ा था।काले कपड़े...काला मास्क...और हाथ में एक सफ़ेद लिफाफा।वह धीरे-धीरे ताली बजा रहा था।ठक... ठक... ठक...इंस्पेक्टर राघव ने तुरंत पिस्तौल तान दी।"रुको!"लेकिन उस आदमी ने भागने की कोशिश नहीं की।वह बस मुस्कुराया...और मास्क उतार दिया।अनिकेत की आँखें फैल गईं।राघव के मुँह से सिर्फ़ एक शब्द निकला—"अ... अर्जुन?"वही चेहरा...वही आँखें...तीस साल पुरानी तस्वीर वाला आदमी।राघव के मृत घोषित किए गए बड़े भाई—अर्जुन।"यह... यह कैसे हो सकता है?" राघव की आवाज़ काँप रही