सुबह के छह बज चुके थे।पहाड़ी के नीचे टूटी हुई जीप के पास अनिकेत अकेला खड़ा था।इंस्पेक्टर राघव का कोई पता नहीं था।चारों तरफ़ सिर्फ़ धुआँ...टूटा हुआ शीशा...और जीप के दरवाज़े पर उँगली से लिखा हुआ संदेश—"राघव हमारे साथ है..."अनिकेत ने फिर से वह धातु की प्लेट उठाई।उस पर उभरा हुआ चिन्ह था—एक सफेद लिफाफा... और उसके चारों ओर बना हुआ एक गोल घेरा।नीचे सिर्फ़ दो शब्द लिखे थे—THE CIRCLEतभी पीछे से किसी ने कहा—"अगर ज़िंदा रहना है...तो उस निशान को अभी फेंक दो।"अनिकेत पलटा।करीब साठ साल का एक बूढ़ा आदमी वहाँ खड़ा था।सफेद दाढ़ी...कंधे पर पुराना बैग...और आँखों में