ईश्वर एक है

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ऋगुवेद सूक्ति-- (57) की व्याख्या एकं सद्विप्रा; बहुधा वदन्ति।ऋगुवेद --1/164/46अर्थ --ईश्वर एक है, ज्ञानी उसे अनेक नामों से पुकारते हैं।यह मंत्र ऋग्वेद (1.164.46) का अत्यंत प्रसिद्ध और गहन दार्शनिक वाक्य है। आइए इसे शुद्ध रूप, पदच्छेद और अर्थ सहित समझते हैं: मंत्रएकं सद् विप्रा: बहुधा वदन्ति।(ऋग्वेद 1.164.46) पदच्छेद (शब्दार्थ)एकं = एकसत् = सत्य, परम सत्य (ईश्वर)विप्राः = विद्वान, ज्ञानी लोगबहुधा = अनेक प्रकार सेवदन्ति = कहते हैं सरल अर्थसत्य (ईश्वर) एक ही है, परंतु ज्ञानी लोग उसे अनेक नामों से पुकारते हैं। भावार्थयह मंत्र बताता है कि:परम सत्य (ईश्वर) एक है, उसमें कोई भेद नहीं। अलग-अलग धर्म, परंपराएँ और साधक उसी एक सत्य को भिन्न-भिन्न