आख़िरी वादा

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गाँव के एक छोटे से घर में राधा अपनी माँ के साथ रहती थी। उसके पिता का कई साल पहले निधन हो चुका था। माँ दिन-रात सिलाई करके घर चलाती थीं, ताकि राधा पढ़-लिखकर अपने सपने पूरे कर सके। घर में ज़्यादा सुविधाएँ नहीं थीं, लेकिन माँ का प्यार हर कमी को पूरा कर देता था।राधा हमेशा कहती थी, "माँ, एक दिन मैं इतनी बड़ी नौकरी करूँगी कि आपको कभी काम नहीं करना पड़ेगा।"माँ मुस्कुराकर कहतीं, "मुझे कुछ नहीं चाहिए बेटी, बस तू हमेशा खुश रहना।"समय बीतता गया। राधा ने मेहनत की, पढ़ाई पूरी की और शहर की एक अच्छी