मैं वो हूँ जो नहीं है ,जो नहीं है वो मैं हूँ।जो अस्तित्व के परे है वो मैं हूँ।जो दृष्टिगोचर हैं वो सृष्टि है, जो सृष्टि के परे हैं वो मैं हूँ।जो श्रव्य हैं वो शब्द है , जो शब्द अतीत है वो मैं हूँ।शिव अर्थात सत्यम, शिवम्, सुंदरम। सत्य ही शिव है और शिव ही सुंदर है। सत्य कोई वस्तु नहीं जिसे पाया जा सके, न कोई अनुभव है जिसे महसूस किया जा सके, न कोई कल्पना है जिसे सोचा जा सके। सत्य न कहीं आता है, न कहीं जाता है। वह न जन्म लेता है, न मरता है।