मृत्यु पर विजय

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मृत्यु पर विजयएक आध्यात्मिक कथा— विजय शर्मा 'एरी' —सीमा पर बर्फ गिर रही थी। मेजर दिग्विजय सिंह बंकर की दीवार से पीठ टिकाए बैठे थे, और उनके दाहिने कंधे से रिसता हुआ रक्त बर्फ को लाल कर रहा था। घड़ी में रात के तीन बज रहे थे, और चारों ओर सन्नाटा था—वह सन्नाटा, जो युद्ध में तूफ़ान से पहले की चुप्पी होता है।"सर, मेडिकल टीम आ रही है," हवलदार रामलाल ने कहा, उनकी आवाज़ काँप रही थी। "आप बस थोड़ी देर और..."दिग्विजय ने आँखें बंद कर लीं। दर्द असहनीय था, पर उससे कहीं अधिक तीव्र वह स्मृति थी, जो अचानक