डर

  • 144

अध्यात्म का बहुत सीधा और सरल अर्थ है—ख़ुद को जानना। (‘अधि + आत्म’) यानी आत्म के और करीब आना। अपने “मैं” को, अपने अहं को, और अपनी वृत्तियों को समझना ही अध्यात्म है। डर, क्रोध, प्रेम, अहम, मोह, कामवासना—ये सब हमारे भीतर चल रही वृत्तियाँ हैं। इन्हें जानना, पहचानना और समझना ही अध्यात्म का असली काम है। अध्यात्म कोई बाहर की चीज़ नहीं है, न कर्मकांड, न वेशभूषा और न ही किसी विशेष परंपरा का पालन करना। जहाँ ख़ुद के मन की, ख़ुद मन के व्यवहार की,और ख़ुद की वृत्तियों की बात नहीं हो रही, वहाँ अध्यात्म नहीं है।अध्यात्म हर