यह दृश्य बेहद भावुक और तनावपूर्ण है। यहाँ उन नारों और शोर की गूंज दी गई है जो संध्या के घर के बाहर सुनाई दे रहे थे, जो उसके मान-सम्मान को पूरी तरह झकझोर देने वाले हैं:घर के बाहर गूंजते नफरत के स्वरपत्रकारों का हमला:"संध्या सिंह, बाहर आइए! क्या अपनी वर्दी का रौब झाड़ना ही आपकी ड्यूटी थी?""क्या आपने डॉ. खन्ना से फिरौती मांगी थी? चुप्पी तोड़िए, बेगूसराय जवाब मांगता है!"भीड़ की नारेबाजी:"वर्दी का अपमान करने वाली... संध्या सिंह मुर्दाबाद!""जो पुलिस डकैती डाले... उस पुलिस को जेल में डालो!""बेगूसराय की बेटी नहीं, बेगूसराय का कलंक है संध्या!"पड़ोसियों की तीखी बातें