यजुर्वेद सूक्ति(8) की व्याख्य"अन्नस्य न: देहि"शुक्ल यजुर्वेद --11/83हे ईश्वर ! हमें उतम अन्न प्रदान करो। पूरा मंत्र अर्थ सहितशुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन शाखा) के अध्याय 11, मंत्र 83 का मूल मंत्र है—अन्नपतेऽन्नस्य नो देह्यनमीवस्य शुष्मिणः।प्र-प्र दातारं तारिष ऊर्जं नो धेहि द्विपदे चतुष्पदेशब्दार्थ:अन्नपते — हे अन्न के स्वामी!अन्नस्य नः देहि — हमें उत्तम अन्न प्रदान करो।अनमीवस्य — रोगरहित।शुष्मिणः — बल और सामर्थ्य से युक्त।प्र-प्र दातारं तारिष — अन्न देने वाले दाता की उन्नति और रक्षा करो।ऊर्जं नः धेहि — हमें पोषण, शक्ति और ऊर्जा दो।द्विपदे चतुष्पदे — दो पैरों वाले (मनुष्यों) और चार पैरों वाले (पशुओं) सभी के लिए।भावार्थ:हे अन्न के अधिष्ठाता