Devil की दास्तान - 38

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(कहानी अब भावनाओं और रहस्यों की गहराई में उतर चुकी थी।कबीर यानी करण अब दो दुनिया के बीच फँसा था —एक दुनिया जिसमें सिया यानी सिमरन की मासूमियत थी,और दूसरी, जिसमें उसका अंधकारमय सच छिपा था।)हवेली का बरामदा – रात का समय(हल्की ठंडी हवा बह रही है। सिया झूले पर बैठी है,उसके बालों को हवा छू रही है।उसकी गोद में एक किताब है, पर निगाहें कहीं दूर खोई हुई हैं।)सिया (धीरे से, खुद से) बोली - “कबीर जी बहुत बदल गए हैं…कभी इतने चुप रहते हैं, कभी कुछ कहते नहीं…मुझे समझ नहीं आता, वो मुझसे कुछ छिपा क्यों रहे हैं…”(तभी कबीर