यजुर्वेद सूक्ति (9) की व्याख्या"प्र प्र दातारं तारिष"यजुर्वेद --11/83भावार्थ --हे ईश्वर ! अन्न देने वाले की रक्षा करो। पूरा मंत्र अर्थ सहितशुक्ल यजुर्वेद (माध्यन्दिन संहिता) अध्याय 11, मंत्र 83 का मूल मंत्र इस प्रकार है—अन्नपतेऽन्नस्य नो देह्यनमीवस्य शुष्मिणः।प्र प्र दातारं तारिष ऊर्जं नो धेहि द्विपदे चतुष्पदे॥पदच्छेद एवं शब्दार्थअन्नपते — हे अन्न के स्वामी (परमेश्वर)!अन्नस्य — अन्न का।नः — हमें।देहि — प्रदान करें।अनमीवस्य — रोगरहित, दोषरहित।शुष्मिणः — बलवर्धक, सामर्थ्ययुक्त।प्र प्र — भली-भाँति, आगे-आगे, पूर्ण रूप से।दातारम् — अन्न देने वाले (दाता) को।तारिष — पार लगाओ, रक्षा करो, संकट से बचाओ।ऊर्जम् — शक्ति, पोषण, ऊर्जा।नः — हमें।धेहि — प्रदान करें।द्विपदे — दो पैरों