ऊर्जं नः धेहि

यजुर्वेद सूक्ति (10) की व्याख्या"ऊर्जं नः धेहि"यजुर्वेद --11/83भावार्थ -- हे ईश्वर! हमें शक्ति प्रदान करें। पूरा मंत्र अर्थ सहित।यजुर्वेद 11.83 का मंत्र (वाजसनेयी संहिता) इस प्रकार है—ऊर्जं नो धेहि द्विपदे चतुष्पदे।(कुछ पाठभेदों में "नः" भी मिलता है, पर प्रचलित पाठ "नो" है।)शब्दार्थ:ऊर्जम् = बल, शक्ति, पोषण, जीवन-ऊर्जानः / नो = हमें, हमारे लिएधेहि = प्रदान करो, स्थापित करोद्विपदे = दो पैरों वाले प्राणियों (मनुष्यों) मेंचतुष्पदे = चार पैरों वाले प्राणियों (पशुओं) मेंभावार्थ:हे परमेश्वर! हमें तथा सभी दोपाये और चौपाये प्राणियों को बल, पोषण, स्वास्थ्य और जीवनदायिनी शक्ति प्रदान करें।यह मंत्र केवल मनुष्यों के लिए ही नहीं, बल्कि समस्त प्राणियों के