सत्य की खोज : मनुष्य सृष्टि और आत्मबोध

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सत्य की खोज : मनुष्य, सृष्टि और आत्मबोधएक दार्शनिक चिंतनलेखिका — चाँदनीजन्म से मृत्यु तक चलने वाली इस यात्रा में मनुष्य असंख्य कर्म करता है। वह हँसता है, रोता है, प्रेम करता है, संघर्ष करता है, सफलता प्राप्त करता है और अंततः उसी मृत्यु की ओर बढ़ता है, जिससे वह जीवनभर प्रश्न करता रहता है। पर क्या उसने कभी स्वयं से पूछा है—मैं यह सब क्यों कर रहा हूँ? मेरे जीवन का उद्देश्य क्या है?क्या केवल जन्म लेना, जीविका कमाना और एक दिन इस संसार से चले जाना ही जीवन का सार है, या इसके पीछे कोई गहन रहस्य भी