*"स्क्रीन और संस्कार: संतुलन ही असली आजादी है"* _लेखक: वंदना शर्मा_एक पुरानी कहावत है - "अगर किसी देश को बर्बाद करना है तो पहले उसकी संस्कृति को बर्बाद कर दो।" आज हमारे समाज में ये बात कई बार सोचने पर मजबूर करती है। पिछले कुछ सालों में तकनीक ने हमारी जिंदगी बदल दी है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब ने दुनिया को मुट्ठी में कर दिया। पर इसी के साथ एक सवाल भी खड़ा हुआ - क्या हम तरक्की कर रहे हैं या अपनी जड़ों से कट रहे हैं?*1. आधुनिकता का मतलब नग्नता नहीं*आज कुछ लोग "आधुनिकता" और "आजादी" के नाम पर अभद्रता, अश्लीलता