Letter Books in Hindi language read and download PDF for free

    मेरी प्यारी माँ
    by Renuka Chitkara
    • 277

    मेरी प्यारी माँ , कैसी हो तुम ? ये भी कोई सवाल हुआ,ठीक ही होंगी अब तो l याद है ना , बचपन में  जब मै बीमार होता था ...

    यादे
    by अभी सिंह राजपूत
    • 373

    यादें एक ऐसा शब्द नहीं नहीं शब्द तो है लेकिन ये एक स्थिति है मन की, जो शायद हर किसी के जीवन में होती है, जिन्दगी में कुछ ऐसा ...

    तुम्हारी पृथ्वी - एक पत्र
    by Sushma Tiwari
    • 366

                                             ब्रह्माण्ड                  ...

    ख़त - डिअर माँ.....
    by Haider Ali Khan
    • 682

    ख़त: डिअर माँ, ना जाने कितने आँसुओं को अपने दामन में समेटकर माँ घर में चुपचाप रहा करती है, सबको अपनेपन का प्यार देकर वह ख़ुद को कितना अकेला ...

    पिनकोड
    by महेश रौतेला
    • 765

    पिनकोड:मैं किसी काम से हल्द्वानी बाजार गया था। बस स्टेशन से गुजर रहा था, नैनीताल की बस पर नजर पड़ी, सोचा नैनीताल घूम कर आऊँ। बिना उद्देश्य कहीं जाना ...

    सागर का तूफान
    by Nirpendra Kumar Sharma
    • 639

    आज एक लेख प्रस्तुत कर रहा हूँ कृपया समीक्षा अवश्य लिखें।"सागर का तूफान", !! आप सोच रहे होंगे ये क्या नाम हुआ । सागर और तूफान दो विपरीत गुण दो ...

    प्यार….. इस शहर में
    by Neelam Kulshreshtha
    • 612

    प्रिय यशी हाय ! कैसी हो ? हम लोग मेल से, मोबाइल से व वॉट्स एप से कितनी बातें करते रहते थे और हमारे बीच लंबा मौन बिछ गया. मैं जानती ...

    पुत्री के नाम पिता का पत्र
    by Pranjal Saxena
    • 694

    जब मैं पिता बना था तब मेरी कलम से अपनी पुत्री के लिए एक पत्र निकला था। आप सबके समक्ष प्रस्तुत है।?प्रिय  पुत्री , 11  मार्च  2015  ये  दिन  खास  ...

    आखिरी ख़त
    by Roopanjali singh parmar
    • 888

    रुद्र,रुद्र मैंने यह खत तुम्हें इसलिए नहीं लिखा कि एक बार फिर तुमसे यह कह सकूं कि मैं तुमसे प्यार करती हूँ, न अपनी कमी का एहसास दिलाना है ...

    Worst Indian Education System
    by Rutvik Chothani
    • 935

    ईसे जरूर पढिये और थोड़ा समझने की कोशिस कीजिये।Jay hind ,       आज में बात करने वाला हूँ भारतीय एजुकेशन सिस्टम के बारेमे।      तो भारतीय एजुकेशन सिस्टम कुछ बनाही इस ...

    बहुत सारा प्यार
    by Roopanjali singh parmar
    • 1.2k

    ❤❤तुमसे पहले कभी किसी इतने छोटे बच्चे को गोद में नहीं लिया था। इसलिए जब पहली बार तुमसे मिलने आ रहे थे तो डर था, तुम्हें गोद में कैसे ...

    ज्ञान(सम्पन्नता,सफलता एंव समृद्धता)
    by Anuradha Jain
    • 580

     ज्ञान हर इंसान के लिए बहुत ही महत्व पूणॆ होता है। हर एक के लिए यह अत्यन्त ही आवश्यक ही है। इस के बिना इस संसार में रहना एसे ...

    कमीने दोस्त
    by ANKIT J NAKARANI
    • 1.8k

    सभी लोग को सिर्फ दो टोपिक मिल गये है एक दोस्त और दूसरा प्यार इसके आलावा कोई कुछ लिखता ही नहीं साला में भी कुछ ऐसा ही लिख रहा ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 21
    by Divya Prakash Dubey
    • 1k

    सेवा में, कुमारी डिम्पल, सविनय निवेदन है कि तुम हमें बहुत प्यारी लगती हो। हम ये चिट्ठी अपने ख़ून से लिखकर देना चाहते थे लेकिन क्या करें हम सोचे कहीं तुम ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 20
    by Divya Prakash Dubey
    • 567

    तुम्हें dear लिखूँ या dearest, ये सोचते हुए लेटर पैड के चार कागज़ और रात के 2 घंटे शहीद हो चुके हैं। तुम्हारी पिछली चिट्ठी का जवाब अभी ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 19
    by Divya Prakash Dubey
    • 375

    संडे वाली चिट्ठी‬ ------------------ पिछले हफ्ते पहली किताब( टर्म्स एंड कंडिशन्स अप्लाई) आए हुए 6 साल पूरे हुए। 6 साल पहले ये चिट्ठी सही में लिख कर अमिताभ बच्च्न को पोस्ट ...

    सभी धर्म के ईश्वर को पत्र
    by Rishi Agarwal
    • 676

    परम् आदरणीय प्रभु,आप तो जानते ही है अब इस युग में आपका सर्वस्व धीरे-धीरे नष्ट होता जा रहा है और हो भी क्यों नहीं, जब इंसान स्वयं को खुदा ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 18
    by Divya Prakash Dubey
    • 914

    डीयर बीवी, मैं इंटरनेट पर हर हफ्ते में इतने ओपेन लेटर पढ़ता हूँ और ये देखकर बड़ा हैरान होता हूँ कि कभी किसी पति ने अपनी बीवी को कोई ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 17
    by Divya Prakash Dubey
    • 391

    संडे वाली चिट्ठी‬ ------------------ Dear पापा जी, कुछ दिन पहले आपकी चिट्ठी मिली थी। आपकी चिट्ठी मैं केवल एक बार पढ़ पाया। एक बार के बाद कई बार मन किया कि ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 16
    by Divya Prakash Dubey
    • 480

    डियर J, मुझे ये बिलकुल सही से पता है कि मैं अपने हर रिश्ते से चाहता क्या हूँ। मुझे क्या हम सभी को शायद ये बात हमेशा से सही से ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 15
    by Divya Prakash Dubey
    • 369

    बाक़ी सब में कितना कुछ समा जाता है न, मौसम, तबीयत, नुक्कड़, शहर, घरवाले, पति, ससुराल सबकुछ । उम्मीद तो यही है कि शादी के बाद बदल गयी ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 14
    by Divya Prakash Dubey
    • 381

    सुनो यार पागल आदमी,  तुमसे ही बात कर रहा हूँ, तुम जो सड़क के किनारे फटे कपड़े, बढ़ी हुई दाढ़ी, उलझे बालों के साथ हर मौसम में पड़े रहते हो। ज़ाहिर है ...

    शराबी नहीं शराब खराब
    by manohar chamoli manu
    • 914

    शराबी नहीं शराब खराब-मनोहर चमोली ‘मनु’मेरे बेवड़े दोस्त ! कैसे हो? यह पूछने का मन भी कहाँ है? भारी मन से तुम्हें यह पत्र लिख रहा हूँ। कैसे लिखूँ ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 13
    by Divya Prakash Dubey
    • 434

    चिट्ठियाँ लिखने का एक फ़ायदा ये है कि आपको लौट कर बहुत सी चिट्ठियाँ वापिस मिल जाती हैं। इधर एक चिट्ठी ऐसी आई जिसमें किसी ने मुझसे पूछा कि ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 12
    by Divya Prakash Dubey
    • 500

    संडे वाली चिट्ठी‬ ------------------ डीयर आदित्य धीमन, और उन तमाम लोगों के नाम जो सोशल नेटवर्क पर लड़कियों ‘पब्लिकली’ को माँ बहन की गाली देते हैं।

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 11
    by Divya Prakash Dubey
    • 462

    डीयर ए जी, आपको अभी चिट्ठी से पहले कभी ए.जी. नहीं बोले लेकिन मम्मी पापा को जब ए.जी. बोलती थीं तो बड़ा ही क्यूट लगता था। आपने कभी सोचा है ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 10
    by Divya Prakash Dubey
    • 577

    Dear फलाने अंकल-ढिमकाना आंटी, जब मैं class 10th का बोर्ड एग्जाम देने वाला था तब आप दोनों घर आते और मेरे घर वालों से कहते देखिये अगर बच्चे के 90 ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 9
    by Divya Prakash Dubey
    • 438

    दुनिया के नाम एक चिट्ठी, जब ये चिट्ठी तुम्हें मिलेगी तब तक शायद मैं न रहूँ। कम से कम मैं वैसा तो नहीं रहूँगा जैसा अभी इस वक़्त हूँ। बहुत ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 8
    by Divya Prakash Dubey
    • 348

    कोटा में IIT की तैयारी कर रहे सैकड़ों लड़के लड़कियों के नाम, यार सुनो, माना तुम लोग अपने माँ बाप की नज़र में दुनिया का सबसे बड़ा काम कर रहे ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 7
    by Divya Prakash Dubey
    • 358

    संडे वाली चिट्ठी‬ ------------------ प्यारे बेटा, मैंने अपने दादा जी की शक्ल कभी नहीं देखी थी. वो मेरे इस दुनिया में आने से बहुत पहले चले गए थे. मैं जब बचपन में ...