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    एक अप्रेषित-पत्र - 14 - अंतिम भाग
    by Mahendra Bhishma

    एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म एक अप्रेषित पत्र दीदी का पत्र आशा के विपरीत आया था। पत्र बहुत संक्षेप में था, उनकी आदत के बिल्कुल उलटे। पत्र में लिखीं चार ...

    एक अप्रेषित-पत्र - 13
    by Mahendra Bhishma

    एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म एक रुपया ‘‘राम नाम सत्य है।'' ‘‘राम नाम सत्य है।'' सेठ राम किशोरजी की शवयात्रा में सम्मिलित दूसरोें के साथ मैंने भी दुहराया। स्वर्गीय सेठ ...

    एक अप्रेषित-पत्र - 12
    by Mahendra Bhishma

    एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म मुन्शीजी मुन्शी गनेशी प्रसाद को विवाह किये बीस बरस बीत चुके हैं अौर इस कस्बाई शहर में आए सत्रह बरस। तब यहाँ नयी—नयी तहसील खुली ...

    एक अप्रेषित-पत्र - 11
    by Mahendra Bhishma

    एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म मग़रिब की नमाज ‘‘सुषमा! प्लीज.... देर हो रही है।'' “बस्स... दो मिनट.... अौर जज साहब।” “क्या सुषमा....? पिछले बीस मिनट से अभी तक तुम्हारे दो ...

    एक अप्रेषित-पत्र - 10
    by Mahendra Bhishma

    एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म मसीहा चाय का घूँट भरते हुए असगर ने विक्रम में चढ़ रही सवारियों की ओर ताका, फिर दूसरा घूँट भरने से पहले उसने टैम्पो ड्राइवर ...

    एक अप्रेषित-पत्र - 9
    by Mahendra Bhishma

    एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म साथ सकलेचा के दो फोन आ चुके थे। रूबी बेड पर पड़ी ऊहापोह की स्थिति में थी। तेजी से पतनोन्मुख सुदर्शन बोकाड़िया ग्रुप ऑफ कम्पनीज़ ...

    एक अप्रेषित-पत्र - 8
    by Mahendra Bhishma

    एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म सतसीरी शहर में कर्फ्यू को लगे आज तीसरी रात है। अस्सी बरस की बूढ़ी दीना ताई की आँखों से नींद कोसों दूर है। जाग घर, ...

    एक अप्रेषित-पत्र - 7
    by Mahendra Bhishma

    एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म वितृष्णा अनार का जूस लेकर जब मैं वापस वार्ड में पहुँची, तो देखा बाबूजी अपनी आँखे बन्द किये झपक चुके थे। उनकी नींद में व्यवधान ...

    एक अप्रेषित-पत्र - 6
    by Mahendra Bhishma

    एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म कर्कशा ‘‘जवानी में दो—दो भोग चुकने के बाद अब बुढ़ापे में तीसरी करने की मंशा है क्या?‘‘ कृशकाय—कंकाल स्वरूपा पत्नी की कर्कश आवाज सुनकर प्रोफेसर ...

    एक अप्रेषित-पत्र - 5
    by Mahendra Bhishma

    एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म कोई नया नाम दो ‘‘जागते रहो'' मध्य रात्रि की निस्तब्धता को भंग करती सेन्ट्रल जेल के संतरी की आवाज और फिर पहले जैसी खामोशी। मैं ...

    एक अप्रेषित-पत्र - 4
    by Mahendra Bhishma

    एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म अब नाथ कर करुणा.... कुछ दिनों से क्या; बल्कि काफी दिनों से उसे सीने के ठीक मध्य से थोड़ा—सा दाहिनी ओर पसलियों के आस—पास, मीठा—मीठा—सा ...

    शिवत्व को सदैव झहर ही पीना पड़ता है
    by મનોજ જોશી

    मोरारीबापु को भी झहर प्रभु प्रसाद समझकर सृष्टि के हित के लिए झहर पी लिया जय सियाराम, बापू?आपके प्राकट्य के पांच कारण बताए थे आपने! में इसका जो अर्थ समझा हूं, ...

    Boycott Chaina
    by Rajesh Kumar

    #Boycott_chainaक्या भारतीय लोगों द्वारा वो प्रभावी कदम सिद्ध होने वाला है जिससे चीन को खरबों का नुकसान उठाना पड़ेगा या फिर केवल सोशल मीडिया पर केवल भड़ास निकलने का ...

    एक अप्रेषित-पत्र - 3
    by Mahendra Bhishma

    एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म रंजना रंजना मेरे ऑफिस की नेत्री है। चपरासी से लेकर बॉस तक सभी से वह एक ही अन्दाज में मिलती। सभी के साथ उसका व्यवहार ...

    एक अप्रेषित-पत्र - 2
    by Mahendra Bhishma

    एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म विरह गति प्रिय रेवा, मेरे जीवन का पल—पल तुम्हें न्योछावर! तुम्हें रूठकर यहाँ से गये, आज पूरा एक माह होने जा रहा है। कल शाम ...

    एक अप्रेषित-पत्र - 1
    by Mahendra Bhishma

    एक अप्रेषित-पत्र महेन्द्र भीष्म बचाओ मैं एक नन्हा—सा वृक्ष हूँ। इस सुन्दर संसार में आए मुझे कुछेक वर्ष ही हुए हैं। नीले आकाश के नीचे, पर्वतमालाओं की तलहटी में ...

    मेरी प्यारी माँ
    by Renuka Chitkara

    मेरी प्यारी माँ , कैसी हो तुम ? ये भी कोई सवाल हुआ,ठीक ही होंगी अब तो l याद है ना , बचपन में  जब मै बीमार होता था ...

    यादे
    by अभी सिंह राजपूत

    यादें एक ऐसा शब्द नहीं नहीं शब्द तो है लेकिन ये एक स्थिति है मन की, जो शायद हर किसी के जीवन में होती है, जिन्दगी में कुछ ऐसा ...

    तुम्हारी पृथ्वी - एक पत्र
    by Sushma Tiwari

                                             ब्रह्माण्ड                  ...

    ख़त - डिअर माँ.....
    by Haider Ali Khan

    ख़त: डिअर माँ, ना जाने कितने आँसुओं को अपने दामन में समेटकर माँ घर में चुपचाप रहा करती है, सबको अपनेपन का प्यार देकर वह ख़ुद को कितना अकेला ...

    पिनकोड
    by महेश रौतेला

    पिनकोड:मैं किसी काम से हल्द्वानी बाजार गया था। बस स्टेशन से गुजर रहा था, नैनीताल की बस पर नजर पड़ी, सोचा नैनीताल घूम कर आऊँ। बिना उद्देश्य कहीं जाना ...

    सागर का तूफान
    by Nirpendra Kumar Sharma

    आज एक लेख प्रस्तुत कर रहा हूँ कृपया समीक्षा अवश्य लिखें।"सागर का तूफान", !! आप सोच रहे होंगे ये क्या नाम हुआ । सागर और तूफान दो विपरीत गुण दो ...

    प्यार….. इस शहर में
    by Neelam Kulshreshtha

    प्रिय यशी हाय ! कैसी हो ? हम लोग मेल से, मोबाइल से व वॉट्स एप से कितनी बातें करते रहते थे और हमारे बीच लंबा मौन बिछ गया. मैं जानती ...

    पुत्री के नाम पिता का पत्र
    by Pranjal Saxena

    जब मैं पिता बना था तब मेरी कलम से अपनी पुत्री के लिए एक पत्र निकला था। आप सबके समक्ष प्रस्तुत है।?प्रिय  पुत्री , 11  मार्च  2015  ये  दिन  खास  ...

    आखिरी ख़त
    by Roopanjali singh parmar

    रुद्र,रुद्र मैंने यह खत तुम्हें इसलिए नहीं लिखा कि एक बार फिर तुमसे यह कह सकूं कि मैं तुमसे प्यार करती हूँ, न अपनी कमी का एहसास दिलाना है ...

    Worst Indian Education System
    by Rutvik Chothani

    ईसे जरूर पढिये और थोड़ा समझने की कोशिस कीजिये।Jay hind ,       आज में बात करने वाला हूँ भारतीय एजुकेशन सिस्टम के बारेमे।      तो भारतीय एजुकेशन सिस्टम कुछ बनाही इस ...

    बहुत सारा प्यार
    by Roopanjali singh parmar

    ❤❤तुमसे पहले कभी किसी इतने छोटे बच्चे को गोद में नहीं लिया था। इसलिए जब पहली बार तुमसे मिलने आ रहे थे तो डर था, तुम्हें गोद में कैसे ...

    ज्ञान(सम्पन्नता,सफलता एंव समृद्धता)
    by Anuradha Jain

     ज्ञान हर इंसान के लिए बहुत ही महत्व पूणॆ होता है। हर एक के लिए यह अत्यन्त ही आवश्यक ही है। इस के बिना इस संसार में रहना एसे ...

    कमीने दोस्त
    by ANKIT J NAKARANI

    सभी लोग को सिर्फ दो टोपिक मिल गये है एक दोस्त और दूसरा प्यार इसके आलावा कोई कुछ लिखता ही नहीं साला में भी कुछ ऐसा ही लिख रहा ...

    वीकेंड चिट्ठियाँ - 21
    by Divya Prakash Dubey

    सेवा में, कुमारी डिम्पल, सविनय निवेदन है कि तुम हमें बहुत प्यारी लगती हो। हम ये चिट्ठी अपने ख़ून से लिखकर देना चाहते थे लेकिन क्या करें हम सोचे कहीं तुम ...