अध्याय 2 तीसरा दिनदाह-संस्कार के बाद का सन्नाटा मौत के सन्नाटे से भी ज़्यादा ज़हरीला होता है। मौत में तो फिर भी एक झटका होता है, एक चीख होती है, लेकिन अंतिम संस्कार के बाद जब श्मशान की राख ठंडी पड़ने लगती है, तब जो खालीपन घर की दीवारों में उतरता है, वह इंसान को अंदर से खोखला कर देता है।आज आर्यन की मृत्यु का तीसरा दिन था।नीलगढ़ के श्मशान घाट पर जब आर्यन की चिता जल रही थी, तब भी धुंध इतनी घनी थी कि दस कदम दूर खड़े लोग भी साये जैसे लग रहे थे। चिता की लपटें