मुंबई...सपनों की नगरी...एक ऐसा शहर जो कभी सोता नहीं।जहाँ रातें भी रोशनी से जगमगाती हैं और हर सुबह अपने साथ हजारों नए ख्वाब लेकर आती है।इस शहर में हर आँख में एक सपना पलता है...कुछ बनने का सपना...कुछ हासिल करने का सपना...अपनी खोई हुई पहचान पाने का सपना...लेकिन...उसी मुंबई में एक ऐसी लड़की भी थी...जिसकी आँखों में न कोई मंजिल थी...न कोई ख्वाब...और न ही किसी मुकाम को पाने की चाह।उसकी आँखों में अगर कुछ था...तो सिर्फ एक आग...एक ऐसा जुनून...जो किसी को मिटाने के लिए जल रहा था।किसी को बर्बाद करने के लिए...और उस आग का नाम था...अन्विका मल्होत्रा।छब्बीस