काली car धीरे-धीरे चौहान हवेली की गली के पास आकर रुकी। संयोगिता कुछ सेकंड तक बाहर देखती रही। उसी गली में रोशनी थी वहीं कहीं विराट अपने बेटे के लिए पागलों की तरह परेशान होगा। उसने धीरे से विवान की तरफ देखा। छोटा बच्चा उसकी गोद में आधा सो चुका था। संयोगिता ने बहुत संभालकर उसे नीचे उतारा। विवान तुरंत उसका हाथ पकड़कर खड़ा हो गया। उसकी छोटी उंगलियाँ अभी भी उसे छोड़ना नहीं चाहती थीं। विवान ने मासूम आँखों से उसकी तरफ देखा।विवान बोला - मम्मा… आप भी चलो ना…ये सुनते ही संयोगिता का दिल जैसे हल्का काँप गया। लेकिन