डायरीकमरे में सन्नाटा इतना घना था कि हवा में तैरते धूल के कण भी जैसे थम गए थे।मीरा के हाथ में वह पुरानी, काले चमड़े की डायरी थी। डायरी के कवर पर उकेरे गए तीन संकेंद्री वृत्त (concentric circles) किसी प्राचीन तांत्रिक यन्त्र की तरह लग रहे थे, और उनके बीच में जड़ा वह छोटा सा नीला पत्थर मद्धम-मद्धम स्पंदित हो रहा था। उस पत्थर से निकलने वाली नीली रोशनी कमरे की पीली रोशनी में एक अजीब सा अमानवीय रंग घोल रही थी।उस पत्थर को छूते ही मीरा को अपनी हथेली पर एक ठंडी सिहरन महसूस हुई बिल्कुल वैसी ही