DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 1 Scene 4.

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SCENE 4."........ आपकी बेटी काफ़ी बदजुबान और बेकार है, इसे अपने गढ़ का हिस्सा हम कैसे बना लें?..............क्या मेरी हरकतें आपके बेटे की हरकत से ज़्यादा बेबाक थी?.... ये बदगुमानी किसलिए है?....... ......... ख़ामोश हो जाओ अब तुम, अम्हेल , बहुत तमाशा लगा लिया है तुमने..............तो क्या उसकी बदतमीज़ी हर हालत में सही थी?......"अम्हेल तन्हा अपने कमरे में बैठे उन लम्हों को सोच रही थी जिस पर उसकी अम्मी जान ने भी यक़ीन नहीं किया। मिबसाम और माहम ने कमरे में आकर देखा कि उसने अपनी चूड़ियां तोड़कर पूरे कमरे में बिखेरा हुआ है और ख़ुद से ख़ुद की कहानी सुन