वो तीसरा दरवाज़ा - भाग 1

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हवेली के उस बंद कमरे से हर रात 12:05 बजे एक धीमी घंटी की आवाज़ आती थी। जब शेखर ने दरवाज़ा खोला, तो सामने कोई नहीं था... बस दीवार पर ताज़ा खून से लिखा था: "अंगुलियों के निशान मत मिटाना, अगला नाम तुम्हारा है।"पुरानी हवेली के उस सुनसान गलियारे में तीन दरवाज़े थे। दो दरवाज़ों के ताले सालों से जंग खा चुके थे, लेकिन तीसरे दरवाज़े पर पीतल का एक चमचमाता हुआ नया ताला लटका हुआ था।शेखर ने जब शहर की भागदौड़ से दूर सुकून पाने के लिए उस हवेली को खरीदा, तो गाँव के बूढ़े चौकीदार ने उसे सिर्फ