"सलाम अम्मा साहब।" सुबह की रौशनी फैलने से पहले ही ऐवान-ए-सद्र में कुसुम की चंचल चहकती आवाज़ ने उसे रौशन कर दिया। अम्मा साहब ने दीवान की तरफ़ बढ़ते हुए कुसुम से पूछा "तुम यहां? बाक़ी की खादिमां कहां हैं?""बाबा को नींद नहीं आ रही थी इसी वजह से मैं नहीं सोई उनके लिए चाय बनाया फिर बाबा ने कहा मैं आपके पास आ जाऊं।" चाय की ट्रे दीवान वाली मेज़ पर रखकर कुसुम ज़मीन पर बिछी लाल नीली क़ालीन पर घुटनों के बल बैठ गई "आप ये गर्म गर्म ले लीजिए।" गर्म चाय की प्याली थमाकर वो खड़ी हो गई"अम्हेल