भस्मोपनिषद--यह उपनिषद के क्रम में 96 वें स्थान पर आया है।भस्मोपनिषद् एक लघु शैव उपनिषद् है, जिसमें भस्म (विभूति) की महिमा, उसके निर्माण-विधि, धारण-विधि, मन्त्र तथा आध्यात्मिक महत्त्व का वर्णन मिलता है। इसे सामान्यतः अथर्ववेद से सम्बद्ध उपनिषदों में गिना जाता है। भस्मोपनिषद् से आशय सामान्यतः भस्मजाबालोपनिषद् (Bhasmajābāla Upaniṣad) से है। यह अथर्ववेद से सम्बद्ध शैव उपनिषद् है और इसके दो अध्याय माने जाते हैं। इसमें भस्म की विधि, मन्त्र, त्रिपुण्ड्र-धारण, रुद्राक्ष, शिवोपासना तथा काशी-माहात्म् का वर्णन है।मैं इसे मूल संस्कृत + सरल हिन्दी अर्थ सहित क्रम से दे रहा हूँ। मूल पाठ में काफी दीर्घ गद्यांश हैं, इसलिए श्लोक के