रुद्रहृदयो उपनिषद

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रुद्रहृदयोपनिषद--रुद्रहृदयोपनिषद् कृष्ण यजुर्वेद से सम्बद्ध शैव उपनिषद् है और उपलब्ध पाठ में 52 मन्त्र/श्लोक हैं।॥ रुद्रहृदयोपनिषत् ॥मंगलाचरणयद्ब्रह्म रुद्रहृदयमहाविद्याप्रकाशितम् ।तद्ब्रह्ममात्रावस्थानपदवीमधुना भजे ॥अर्थ:रुद्रहृदय की महान विद्या द्वारा जिस ब्रह्म का प्रकाश होता है, उस ब्रह्मस्वरूप में स्थित होने की अवस्था का मैं अब आश्रय लेता हूँ।ॐ सह नाववतु । सह नौ भुनक्तु । सह वीर्यं करवावहै ।तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ।ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥अर्थ:हे परमात्मन्! हम दोनों की रक्षा करें, हम दोनों का पालन करें, हम मिलकर सामर्थ्यपूर्वक अध्ययन करें। हमारा अध्ययन तेजस्वी हो और हम परस्पर द्वेष न करें। शान्ति, शान्ति, शान्ति।१. रुद्रहृदय का स्वरूपहृदयं कुण्डली भस्मरुद्राक्षगणदर्शनम् ।तारसारं महावाक्यं पञ्चब्रह्माग्निहोत्रकम् ॥