अपनी ही चाह में

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अध्याय 1: रात का आशियानामुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर, महाबलेश्वर के शांत पहाड़ों के बीच 'इरविन कॉटेज' नाम का एक पुराना लकड़ी का घर था। उस घर के बड़े से बगीचे में जब लाल-गुलाबी गुलाब खिलते, तो ऐसा लगता मानो कोई पुरानी पेंटिंग जीवंत हो उठी हो।उसी घर की पहली मंजिल की बालकनी में खड़ी थी—नवोदिता।चौबीस साल की नवोदिता के चेहरे पर एक अजीब सी मासूमियत और आंखों में गहरा खालीपन था। वह पेशे से एक लेखिका थी, लेकिन उसकी पहचान सिर्फ उसकी किताबें नहीं थीं। नवोदिता के साथ एक ऐसी बात थी जो उसे बाकी दुनिया स