अवंतिका: छलावा और हकीकत - 1

  • 96

रात के करीब बारह बज रहे थे। रामपुर गाँव सन्नाटे की एक गहरी चादर में लिपटा हुआ था। आसमान में काले बादलों का डेरा था, जिससे उठती ठंडी हवाएँ गाँव की पगडंडियों पर लगे पीपल के पेड़ों को किसी खौफनाक तरीके से झकझोर रही थीं। गाँव के किनारे पर स्थित वर्षों पुराना शिव मंदिर का खंडहर दिन में जितना उजाड़ दिखता था, इस अमावस की काली रात में उतना ही भयावह प्रतीत हो रहा था।​खण्डहर के एक अंधेरे कोने में विक्रम हड़बड़ी में खड़ा था। उसकी सांसें फूली हुई थीं और चेहरा पसीने से तर-बतर था। वह बार-बार अपनी कलाई