SCENE 5.आसीगाह के कैदियों के बीच डॉक्टर हम्ज़ा का नया वजूद आ गया। वो किनारे बैठा हुआ शायद अपनी ही ग़लती पर ग़ौरफिक्र में था, शायद यहां पहुंचकर उसे समझ आ गया की उसे गुलशन में खिले फूल को तोड़ने की कोशिश नहीं करना चाहिए था, यहां की दीवारें इतनी सख़्त है कि इसपर किसी भी क़िस्म के वार का कोई असर नहीं होगा। हम्ज़ा अपनी ग़लतियों पर अक्स डालने लगा। उसे अभी आसीगाह में ज़्यादा देर नहीं हुई थी इसलिए आसीगाह के सारे क़ैदी इसे घेर कर इसके गुनाह के बारे में तरह तरह के सवाल करने लगे थे