सावित्री उपनिषद -- सावित्री उपनिषद् सामवेद से सम्बद्ध लघु उपनिषद् है और उपलब्ध पाठ में मुख्यतः १५ मन्त्र/खंड हैं। इसका केंद्रीय विषय सावित्री-विद्या और गायत्री मन्त्र का दार्शनिक विवेचन है। ॥ सावित्र्युपनिषत् ॥मंगलाचरणसावित्र्युपनिषद्वेद्यचित्सावित्रपदोज्ज्वलम् ।प्रतियोगिविनिर्मुक्तं रामचन्द्रपदं भजे ॥सावित्र्यात्मा पाशुपतं परं ब्रह्मावधूतकम् ।त्रिपुरातपनं देवीत्रिपुरा कठभावना ॥हिन्दी अर्थ :मैं उस श्रीरामचन्द्र के परम पद का ध्यान करता हूँ, जो सावित्री उपनिषद् द्वारा जानने योग्य चैतन्य-स्वरूप है और समस्त द्वैत से रहित है। सावित्री का आत्मस्वरूप पाशुपत तत्त्व, परम ब्रह्म तथा अवधूत अवस्था है; वही देवी त्रिपुरा और कठ-परम्परा में चिन्तित परम तत्त्व है।शान्तिपाठॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुः श्रोत्रमथोबलमिन्द्रियाणि च । सर्वाणि सर्वं ब्रह्मोपनिषदं माहं ब्रह्मनिराकुर्यां मा