अब तकमिस्टर विक्रम जबरदस्ती फ़ना को वाइन पिला दिए। जिससे फ़ना का गला जलने लगा और कड़वाहट के कारण उसे खांसी आने लगी। विक्रम भारद्वाज फ़ना के साथ बिल्कुल भी नरम नहीं थे। वह डर से कांप रही थी, उनकी गोद में बैठी बैठी।मिस्टर भारद्वाज ने एक बार फिर से फ़ना के गाल पर अपने होंठ रख दिए।उसके बाद उन्होंने फ़ना की गर्दन पर जैसे ही अपनी उंगलियां फैरी, फ़ना ने धीरे से कहा, " सर"अब आगे-मिस्टर भारद्वाज ने जैसे ही फ़ना की सुराही दार गर्दन पर अपनी उंगलियों को फेरना स्टार्ट किया, फ़ना ने सहमते हुए धीरे से कहा,