उस रात शहर पर अजीब सी खामोशी छाई हुई थी.आसमान में काले बादल जमा थे और तेज हवा पुराने पेडों की शाखाओं को झकझोर रही थी. कुछ देर पहले हुई बारिश के कारण गलियां सुनसान थीं. सडक पर लगी पीली रोशनियां बारिश की बूंदों से धुंधली दिखाई दे रही थीं.शहर के पुराने हिस्से में एक छोटा सा मकान था. उसी मकान की दूसरी मंजिल पर आरव अपने कमरे में बैठा था.उसकी मेज पर किताबें खुली पडी थीं, लेकिन पिछले आधे घंटे से उसने एक भी पन्ना नहीं पलटा था.उसका ध्यान बार- बार खिडकी की तरफ जा रहा था.उसे पता नहीं