शाट्यायनी उपनिषद -- नीचे शुक्ल यजुर्वेदान्तर्गत शाट्यायनीय उपनिषद् का मूल संस्कृत पाठ क्रमशः दिया जा रहा है और प्रत्येक मंत्र/श्लोक के नीचे उसका सरल हिन्दी अर्थ है। उपलब्ध पाठ-स्रोत इसे संन्यास-उपनिषद् के रूप में वर्गीकृत करता है और इसमें कुल ३७ मंत्र हैं।॥ शाट्यायनीयोपनिषत् ॥मंगलाचरणशाट्यायनीब्रह्मविद्याखण्डाकारसुखाकृति ।यतिवृन्दहृदागारं रामचन्द्रपदं भजे।।अर्थ:मैं उन भगवान् श्रीरामचन्द्र के चरणों का भजन करता हूँ, जो शाट्यायनी ब्रह्मविद्या के अखण्ड आनन्दस्वरूप हैं और संन्यासियों के हृदय में निवास करते हैं। ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्यते ।पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥अर्थ:वह परम ब्रह्म पूर्ण है और यह जगत् भी उसी पूर्ण ब्रह्म से प्रकट हुआ है। पूर्ण से पूर्ण की अभिव्यक्ति होने पर भी