ज़रा सोचिए... मोबाइल या कंप्यूटर में चाहे जितना बेहतरीन हार्डवेयर हो, दुनिया भर का ज्ञान इंटरनेट पर मौजूद हो, लेकिन अगर उसमें ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) न हो, तो वह सिर्फ सिलिकॉन का एक बेजान डिब्बा बनकर रह जाता है। ऑपरेटिंग सिस्टम ही वह अदृश्य धागा है जो बेजान मशीन में जान फूँकता है। इंसानी शरीर की हकीकत भी ऐसी ही है। जब तक इस देह रूपी मशीन में चेतना रूपी OS का पहरा है, तब तक सुई की एक चुभन भी रूह तक महसूस होती है। लेकिन जब वह चेतना निकल जाती है, तब चाहे जितने वार करो,