मौसमे सर्मा को अभी ज़्यादा वक़्त नहीं हुआ था पर बरसात भी अपने आप को उससे ओझल न रख सका।रह रहकर वो भी अपनी झलक सर्मा को दिखा रहा था और अब तूफ़ानी हवाएं और घिरते बादलों के ज़रिए वो सर्मा को अपने आने का पैग़ाम भी देने लगा, हालांकि सर्दी अभी बारिश के इस्तिक़बाल के लिए तयार नही थी। बारिश की हवाएं भी सर्द हवाओं में घुलने लगी, साथ मिलकर ये पेड़ पौधों से टकराती, धूल मिट्टी उड़ाती, किसी से भी टकराकर उनके कपड़े, बालों को बिखेर दे रही थीं। सुबह सूरज की तपिश में सुकून लेते लोग अचानक घिरते