मेरी जिंदगी

  • 225
  • 75

जिंदगी तो बच गई, पर खुद से हार रहा हूँ... (एक अनकही सच्चाई)यह कहानी शुरू होती है साल 2004 से। महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव में एक लड़के का जन्म हुआ। जन्म के साथ ही वह लड़का इतना कमजोर और बीमार था कि अगर कोई उसे एक घंटे के लिए भी अकेला छोड़ दे, तो इस बात की कोई गारंटी नहीं थी कि वह अगली सांस ले भी पाएगा या नहीं। उसे हर पल किसी न किसी की देखभाल की जरूरत थी।उसकी किस्मत में सबसे अच्छी चीज थी उसके माता-पिता। वे इतने नेक और प्यार करने वाले थे कि