कभी कभी ज़िंदगी हमें ऐसी चीज़ें दे देती है, जो हमने कभी माँगी भी नहीं होती… पर वही चीज़ें हमारी सोच और दिल दोनों बदल देती हैं। मैं राधा रानी, एक सीधी-सादी लड़की। मेरी ज़िंदगी बिल्कुल आम थी। ना कोई बड़ी ख्वाहिश, ना कोई अलग कहानी… बस अपने लोगों के साथ छोटी छोटी खुशियों में जीने वाली। मुझे लगता था मेरी लाइफ भी बाकी लोगों जैसी ही होगी… पर शायद किस्मत ने मेरे लिए कुछ और ही लिख रखा था। उस दिन घर की सफाई करते हुए मुझे एक पुरानी डायरी मिली। धूल से भरी हुई, थोड़ी टूटी सी… जैसे सालों से किसी ने उ
Bayaan - Part 1
March 2025कभी कभी ज़िंदगी हमें ऐसी चीज़ें दे देती है, जो हमने कभी माँगी भी नहीं होती…पर वही चीज़ें सोच और दिल दोनों बदल देती हैं।मैं राधा रानी, एक सीधी-सादी लड़की।मेरी ज़िंदगी बिल्कुल आम थी।ना कोई बड़ी ख्वाहिश, ना कोई अलग कहानी…बस अपने लोगों के साथ छोटी छोटी खुशियों में जीने वाली।मुझे लगता था मेरी लाइफ भी बाकी लोगों जैसी ही होगी…पर शायद किस्मत ने मेरे लिए कुछ और ही लिख रखा था।उस दिन घर की सफाई करते हुए मुझे एक पुरानी डायरी मिली।धूल से भरी हुई, थोड़ी टूटी सी… जैसे सालों से किसी ने उसे छुआ ही ना ...Read More
Bayaan - Part 2
Part 2March 2025उस रात मैं बिल्कुल सो नहीं पाई। बार बार वही डायरी मेरे दिमाग में घूम रही थी। पन्ने में जैसे कोई राज छुपा था… और सबसे ज़्यादा मेरे दिल को जो नाम छू रहा था, वह था — अभिनव।पता नहीं क्यों, पर उसका नाम पढ़ते ही दिल में एक अजीब सी फीलिंग होने लगती थी। जैसे मैं उसे पहले से जानती हूँ। जैसे उसकी कहानी कहीं न कहीं मेरी ज़िंदगी से जुड़ी हुई हो।अगली सुबह मैंने सबसे पहले वही डायरी उठाई। कमरे में बिल्कुल शांति थी। बाहर हल्की हल्की हवा चल रही थी और मेरे हाथ थोड़े ...Read More
Bayaan - Part 3
Part 3 ."क्या इस डायरी में अभिनव का रिश्ता मुझसे था क्या हम कभी मिले थे, और वो राधा कौन थी उसका नाम मेरे जैसा क्यूँ था.मैंने अगले दिन वापस उस डायरी को खोला क्यूँकि मुझे खुद पर काबू नहीं था, मेरी उत्सुकता ना जाने क्यूँ बढ़ने लगी मैंने जैसे ही राधा रानी की डायरी खोली उसमें लिखा था..."पहली मुलाकात" जब मैंने यह हेड लाइन पढ़ी तब मुझे और उत्सुकता होने लगी जब मैंने आगे पढ़ा तो राधा रानी ने उसमें लिखा था ^March 2025 ^ ..जब मैंने पहली बार अभिनव को स्कूल के कपड़ों में सुनहरे बाल गोरा ...Read More
Bayaan - Part 4
Part 4 उस रात मैं अपने कमरे में बैठी थी, लेकिन मेरा ध्यान कहीं और ही था। मेरे सामने रखा था और दिमाग में सिर्फ वही कोड वर्ड घूम रहा था। आखिरकार मैंने उसका मतलब निकाल ही लिया। कोड वर्ड था — "N.S." जिसका मतलब था — "नज़र से" मैं कुछ पल तक स्क्रीन को देखती रह गई। इतना छोटा सा शब्द, लेकिन उसके पीछे कितनी बड़ी कहानी छिपी हुई थी। मैंने तुरंत डायरी का अगला पन्ना खोला। वहाँ राधा रानी ने लिखा था— "शायद मैं पागल हूँ। मैंने उस लड़के को केवल दो बार देखा है, फिर भी ...Read More
Bayaan - Part 5
Part 5 . बारे में जान रही थी, उतना ही मुझे लग रहा था कि वह खुद भी अपनी को पूरी तरह नहीं समझ पाई थी। वह बार-बार लिखती थी कि उसे अभिनव से प्यार नहीं है, लेकिन उसकी हर दूसरी बात किसी न किसी तरह अभिनव पर आकर रुक जाती थी। मैंने अगला पन्ना खोला। वहाँ लिखा था— "आज मैंने फिर खुद से कहा कि मुझे अभिनव के बारे में नहीं सोचना चाहिए। आखिर मैंने उसे केवल दो बार ही देखा है। पहली बार स्कूल में और दूसरी बार पवन चाचा के यहाँ हुई नौटंकी में।" "लेकिन पता ...Read More