Conversations With Myself

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यह कहानी किसी एक नाम, किसी एक चेहरे या किसी एक ज़िंदगी की नहीं है…यह कहानी उन सभी एहसासों की है, जो हम अक्सर दुनिया से छुपा लेते हैं।यह कहानी मेरी है…और शायद… तुम्हारी भी।कभी-कभी ज़िंदगी बहुत शांत लगती है,लेकिन उसी खामोशी में हमारे सबसे गहरे सवाल छुपे होते हैं।वो सवाल, जिनके जवाब हमें बाहर नहीं… बल्कि अपने अंदर ढूंढने पड़ते हैं।मैंने हमेशा महसूस किया है कि हर इंसान के भीतर एक अलग ही दुनिया होती है।

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Conversations With Myself - 1

यह कहानी किसी एक नाम, किसी एक चेहरे या किसी एक ज़िंदगी की नहीं है…यह कहानी उन सभी एहसासों है, जो हम अक्सर दुनिया से छुपा लेते हैं।यह कहानी मेरी है…और शायद… तुम्हारी भी।कभी-कभी ज़िंदगी बहुत शांत लगती है,लेकिन उसी खामोशी में हमारे सबसे गहरे सवाल छुपे होते हैं।वो सवाल, जिनके जवाब हमें बाहर नहीं… बल्कि अपने अंदर ढूंढने पड़ते हैं।मैंने हमेशा महसूस किया है कि हर इंसान के भीतर एक अलग ही दुनिया होती है।एक ऐसी दुनिया जहाँ हम खुद से बात करते हैं,जहाँ हम अपने डर को समझते हैं,और अपने सपनों को धीरे-धीरे प ...Read More

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Conversations With Myself - 2

शाम धीरे-धीरे ढल रही थी।पूरा दिन जैसे आँसुओं में भीगकर निकल गया। अब आँखें तो सूख चुकी थीं, लेकिन अब भी उतना ही भारी था। कभी-कभी ऐसा लगता है कि इंसान रोते-रोते थक तो जाता है, पर उसके अंदर का दर्द थकना नहीं जानता।सोचा था कि थोड़ी देर के लिए फोन उठा लूँ। शायद कोई अच्छी-सी वीडियो देख लूँ, कोई गाना सुन लूँ, या बस कुछ पल के लिए खुद को भूल जाऊँ। लेकिन जैसे ही एक गहरी साँस ली, घर में फिर किसी ने आवाज़ लगा दी। कोई काम, फिर दूसरा काम, फिर तीसरा… कभी-कभी लगता है कि ...Read More