विजयनगर के एक छोटे से गाँव से एक लड़की महाविद्यालय में प्रवेश लेने आई। नाम था उसका अनामिका। पतली लंबी, घुंघराले बाल, साधारण सा व्यक्तित्व। हिंदी विभाग में गई और सुरभि प्राध्यापिका को अपना फॉर्म देते हुए बोली - "मैम मुझे एम.ए करना है।" सुरभि प्राध्यापिका ने पूछा - "गाँव से इतनी दूर रोज क्लास लेने आ पाओगी?" अनामिका ने दृढ़ संकल्प के साथ कहा - "जी मैम जरूर आऊँगी। मुझे अपनी पहचान बनानी है।" सुरभि प्राध्यापिका ने उसे शाबाशी दी और साहित्य की कुछ किताबें पढ़ने के लिए दीं। "कल सुबह 9 बजे आना है।"
अनामिका - 1
अनामिकाविजयनगर के एक छोटे से गाँव से एक लड़की महाविद्यालय में प्रवेश लेने आई। नाम था उसका अनामिका। पतली घुंघराले बाल, साधारण सा व्यक्तित्व। हिंदी विभाग में गई और सुरभि प्राध्यापिका को अपना फॉर्म देते हुए बोली - "मैम मुझे एम.ए करना है।"सुरभि प्राध्यापिका ने पूछा - "गाँव से इतनी दूर रोज क्लास लेने आ पाओगी?"अनामिका ने दृढ़ संकल्प के साथ कहा - "जी मैम जरूर आऊँगी। मुझे अपनी पहचान बनानी है।"सुरभि प्राध्यापिका ने उसे शाबाशी दी और साहित्य की कुछ किताबें पढ़ने के लिए दीं। "कल सुबह 9 बजे आना है।"अनामिका बहुत खुश थी। जैसे उसके सपनों को ...Read More
अनामिका - 2
पिछले अंक में आपने पढ़ा था कि विनीता की शादी तय हो गई थी। अनामिका बहुत खुश हुई थी उसने अपनी दोस्त के लिए खूब शॉपिंग कराई थी।विनीता की शादी दिल्ली में धूमधाम से हो गई। शादी के बाद वो अपनी गृहस्थी में रम गई। धीरे-धीरे अनामिका से उसकी बातें भी कम होने लगी थीं।एक दिन विनीता दोपहर में घर पर बैठी पत्रिका पढ़ रही थी। तभी रिया का फोन आया। रिया की शादी के बाद वो गुड़गांव में बस गई थी, पर अनामिका से उसका संपर्क अब भी था।"विनीता," रिया ने घबराई हुई आवाज में कहा, "तुम्हें अनामिका ...Read More