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Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Women Focused in All books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultur...Read More


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आईपण देऊया एकमेकींना… By Punam Bhagat

“आईपण देऊया एकमेकींना…”लग्न झाल्यावर मुलगा आईचा पल्लू धरून राहतो?की आईच मुलाला घट्ट धरून ठेवते… आणि मग सून एकटी पडते? स्वतःचा संसार उभा करू शकत नाही?हा प्रश्न आजचा नाही… पिढ्यानपिढ...

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आखिर कातिल कौन..?! By softrebel

_"कहल जाला नीमन घर बर खोजत खोजत बाप के एड़ी खिया जाला।बाकि अब से कहल जाई की बाप के एड़ी दू बार खियाला एक बार नीमन घर बर खोजे मे तऽ दोसर नीमन घर बर मे घटियावल बेटी के न्याय दियावे म...

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जंगल - 39 By Neeraj Sharma

39 वा धारावाहिक ईश्वर की प्राप्ति के लिए कितना संघर्च करना पड़ता है तुम जानते भी हो ---- बहुत लोग ईश्वर को प्रश्न चिन से देखते है --- हे भी कि फिर....ये उपन्यास यही से शुरू हो रहा ह...

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ଅନ୍ୟ ଏକ ସାବିତ୍ରୀ By Gopal Krushna Das

                       ଅନ୍ୟ ଏକ ସାବିତ୍ରୀ                                                                            ଲେଖକ:- ଗୋପାଳ କୃଷ୍ଣ ଦାସ                                          ...

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ભૂલ છે કે નહીં ? - ભાગ 107 By Mir

મને ભાણીની વાત સાંભળીને જાણે આધાત લાગ્યો. કે બેનથી ભાણીના વાળની ગૂંચ પણ ન નીકળે કે એને માર્યા કરે. મારા મનમાં હજારો વિચારો આવી ગયા કે લગભગ ત્રણ થી સાડા ત્રણ વરસ ભાણી આપણા ઘરે રહી....

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पंछी का पिंजरा - भाग 4 By Anil Kundal

मुझे दो दिन बाद होश आया था। डाक्टर नर्सस और जान पहचान के सभी लोगों ने मेरी बचने की उम्मीद पूरी तरह से खो दी थी। जैसे कि बीच नदी के पहुँचते ही भंवर उठने पर मल्लाहें सभी तरह की आशाओं...

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त्रिशा... - 48 By palvisha

त्रिशा ने एक बार गाड़ी में बैठे राजन को देखा और देखती रह गई। फिर उसकी नजर वहां खड़े उन सभी लोगों पर गई जो उसे ही घूर के देख रहे है और अचानक ही त्रिशा का उन लोगों की तरफ देखने का सा...

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मुझे क्या बेचेगा रुपैया By Virrajsinh jadeja

मुझे क्या बेचेगा रुपैया" सिर्फ एक गाना नहीं है। ये उस हर लड़की की आवाज़ है जिसे दहेज, समझौता और 'बोझ' जैसे शब्दों से बाँधने की कोशिश की गई। इस गाने के बोल सीधे दिल पर वार क...

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ভোরের আলো - 1 By prem chand hembram

( শ্রী শ্রী ঠাকুরের এক দয়ার কাহানি  )অন্ধকারের সঙ্গে প্রথম পরিচয়ধনবাদ জেলার কয়লানগরীর কাছে একটি বড় বাঙালি কলোনি ছিল।তার চারপাশে টিন, প্লাস্টিক আর খড়ের ছাউনি দিয়ে তৈরি অসংখ্য...

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ज़ख्मों की शादी - 20 By Sonam Brijwasi

कबीर कुछ बोलने ही वाला था। उसके होंठ खुले…शब्द जैसे बाहर आने को तैयार थे।तभी सृष्टि की धीमी लेकिन ठहरी हुई आवाज़ आई—मुझे कोई बात नहीं सुननी…Please… मुझे सोने दीजिए।Disturb मत कीजिए...

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जीवन की नई डोर - भाग 1 By prem chand hembram

दीक्षा — भाग १ अंधकार से प्रथम परिचयधनबाद जिले की कोयला नगरी के समीप बंगालियों की एक बड़ी कॉलोनी थी।उसके चारों ओर टीन, प्लास्टिक और खपरैल से बने कई झोपड़ीनुमा घर बिखरे पड़े थे।सुबह...

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Counterfeit Coin By Alok Mishra

        Evening was falling. The chill in the air was sharp, the winds howling fiercely. Drawn by a craving for a cigarette, Ashok left his room at Ashok Lodge and wandered down to...

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रंग माझा वेगळा - 3 By manasvi Manu

भाग तीन " एक मिनिट ... माझं आधी ऐकून घ्या आणि मग तुमचा जो निर्णय असेल मला मान्य असेल ... please .  बसा . " सरिता पुन्हा वळली तिने सागर कडे बघितलं . तिला त्याच्या डोळ्यात काहीतरी जा...

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बिल्ली जो इंसान बनती थी - 21 By Sonam Brijwasi

तांत्रिक जैसे ही तलवार शानवी की ओर उठाने वाला था…पूरा कमरा सन्न हो गया। लेकिन तभी—एक तेज़, गूंजती हुई आवाज़ आई—रुक जाओ!सभी की नज़र पीछे मुड़ी। दरवाज़े पर खड़ा था… कार्तिकेय। उसकी...

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आर्या ( भाग १५ ) By suchitra gaikwad Sadawarte

     ( पाच वर्षानंतर )    सकाळी सकाळी श्वेता ची आवराआवर चालू असते. आठ वाजले असतात , ती जोरजोरात अनुराग ... अनुराग.. अनुराग अरे...उठा रे! किती रोज रोज त्रास देता मला तुम्ही तिघे ! प...

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खोंटा सिक्का By Alok Mishra

शाम हो रही थी। ठंड़ी हवाऐं बहुत तेज बह रहीं थी। ऐसे में अशोक लाज का कमरा छोड़ कर सिगरेट की तलब में नीचे चौराहे पर गुमटी तक आया। एक सिगरेट जला कर खुद को हलका और गर्म महसूस करने लगा।...

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 24 By Sonam Brijwasi

Shreya सोफे पर अकेली बैठी थी।उसके चेहरे पर आँसू सूखते-सूखते फिर बह जाते।कमरा पहले जैसा नहीं था…ना वही गर्माहट, ना वही हँसी।तभी—उसके फोन पर एक टन की आवाज़ आई।वह चौंककर उठी।फोन में उ...

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तपती दोपहरी By prem chand hembram

तपती दोपहरी बैसाख की तपती दोपहरी…आसमान से आग बरस रही थी।ऐसा समय, जब लोग घर से बाहर निकलने से भी कतराते हैं।पुराने बाज़ार के एक कोने में राजू अपनी रिक्शा लेकर खड़ा था।सामने सत्तू की...

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સ્ત્રી અને સમાજ આધુનિક યુગ ની સંઘર્ષ ગાથા - 6 By Komal L

Chapter 6 social media નો દુરુપયોગ કરતી સ્ત્રીઓસોશિયલ મીડિયા આજે સ્ત્રીઓ માટે સૌથી મોટું સશક્તિકરણનુંસાધન છે, પરંતુ તે જ સમયે તેનો દુરુપયોગ પણ સ્ત્રીઓ જ કરી રહી છે – અને તેનુંપ્રમા...

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श्रद्धांजली By Trupti Deo

“त्या चार वर्षांच्या चिमुकलीसाठी…”आज शब्दही थरथरतात… कारण ही फक्त एक बातमी नाही, ही एका निष्पाप जीवाची निःशब्द किंकाळी आहे. चार वर्षांची ती मुलगी… जिने अजून आयुष्याच्या पानांवर पहि...

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ममता ...एक अनुभूति... - 5 By kalpita

थकान और कमजोरी से लड़की की  आँखें भारी होने लगीं। नींद और बेहोशी के बीच  बड़बड़ाई—“माता रानी… मैंने कभी किसी माँ की झोली खाली करने का इरादा नहीं किया था… सुनीता पर दया करो… उसकी ममत...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 41 (अंतिम भाग) By Jyoti Prajapati

ये मेरी चार साल पुरानी रचना थी। जिसे मैने तब पब्लिश नहीं किया था क्योंकि लैपटॉप खराब हो गया था। उस समय मेरी ज्यादातर कहानियां फैमिली पर ही होती थी। शहर की चकाचौंध से दूर, उस पुराने...

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આહુતિ ની પરાકાષ્ઠા By Urmi Sonagara

આ એવી આહુતિ છે જેમાં બધું હોમાય તો જાય અને પછી ધુવાડો થાય તો પણ છેલ્લે આહુતિ નો જ દોષ કાઢવામાં આવે છે , એવું વક્તિવ જેના વગર આ સૃષ્ટી આધુરી છે .એક સ્ત્રી જેને તેની આખી જિંદગી માં મ...

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ગુજરાતી લોકગીત - ભાગ 1 By Mansi Desai Shastri

લોકગીત 1 નણદલ માગે લહેરિયું.મારા લહેરિયામાં લાગી લુંટાલૂટ હો. નણદલ માગે લહેરિયું રે બાઈ!મારા દાદાનું દીધેલું લહેરિયું રે બાઈ। મારી માતાની બાંધેલ લાંક હો. નણદલ માગે લહેરિયું રે બાઈ!...

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सपनों की डोली। - 5 By softrebel

__मौन के पार से आई खबर___बच्चों के मन में उत्पन्न सवालों को नारायणी अक्सर इधर उधर की बातें कर टालने का प्रयास करती।नारायण के बिन पहले कुछ दिन बीते, फिर सप्ताह और महीने...धीरे-धीरे...

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आईपण देऊया एकमेकींना… By Punam Bhagat

“आईपण देऊया एकमेकींना…”लग्न झाल्यावर मुलगा आईचा पल्लू धरून राहतो?की आईच मुलाला घट्ट धरून ठेवते… आणि मग सून एकटी पडते? स्वतःचा संसार उभा करू शकत नाही?हा प्रश्न आजचा नाही… पिढ्यानपिढ...

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आखिर कातिल कौन..?! By softrebel

_"कहल जाला नीमन घर बर खोजत खोजत बाप के एड़ी खिया जाला।बाकि अब से कहल जाई की बाप के एड़ी दू बार खियाला एक बार नीमन घर बर खोजे मे तऽ दोसर नीमन घर बर मे घटियावल बेटी के न्याय दियावे म...

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जंगल - 39 By Neeraj Sharma

39 वा धारावाहिक ईश्वर की प्राप्ति के लिए कितना संघर्च करना पड़ता है तुम जानते भी हो ---- बहुत लोग ईश्वर को प्रश्न चिन से देखते है --- हे भी कि फिर....ये उपन्यास यही से शुरू हो रहा ह...

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ଅନ୍ୟ ଏକ ସାବିତ୍ରୀ By Gopal Krushna Das

                       ଅନ୍ୟ ଏକ ସାବିତ୍ରୀ                                                                            ଲେଖକ:- ଗୋପାଳ କୃଷ୍ଣ ଦାସ                                          ...

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ભૂલ છે કે નહીં ? - ભાગ 107 By Mir

મને ભાણીની વાત સાંભળીને જાણે આધાત લાગ્યો. કે બેનથી ભાણીના વાળની ગૂંચ પણ ન નીકળે કે એને માર્યા કરે. મારા મનમાં હજારો વિચારો આવી ગયા કે લગભગ ત્રણ થી સાડા ત્રણ વરસ ભાણી આપણા ઘરે રહી....

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पंछी का पिंजरा - भाग 4 By Anil Kundal

मुझे दो दिन बाद होश आया था। डाक्टर नर्सस और जान पहचान के सभी लोगों ने मेरी बचने की उम्मीद पूरी तरह से खो दी थी। जैसे कि बीच नदी के पहुँचते ही भंवर उठने पर मल्लाहें सभी तरह की आशाओं...

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त्रिशा... - 48 By palvisha

त्रिशा ने एक बार गाड़ी में बैठे राजन को देखा और देखती रह गई। फिर उसकी नजर वहां खड़े उन सभी लोगों पर गई जो उसे ही घूर के देख रहे है और अचानक ही त्रिशा का उन लोगों की तरफ देखने का सा...

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मुझे क्या बेचेगा रुपैया By Virrajsinh jadeja

मुझे क्या बेचेगा रुपैया" सिर्फ एक गाना नहीं है। ये उस हर लड़की की आवाज़ है जिसे दहेज, समझौता और 'बोझ' जैसे शब्दों से बाँधने की कोशिश की गई। इस गाने के बोल सीधे दिल पर वार क...

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ভোরের আলো - 1 By prem chand hembram

( শ্রী শ্রী ঠাকুরের এক দয়ার কাহানি  )অন্ধকারের সঙ্গে প্রথম পরিচয়ধনবাদ জেলার কয়লানগরীর কাছে একটি বড় বাঙালি কলোনি ছিল।তার চারপাশে টিন, প্লাস্টিক আর খড়ের ছাউনি দিয়ে তৈরি অসংখ্য...

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ज़ख्मों की शादी - 20 By Sonam Brijwasi

कबीर कुछ बोलने ही वाला था। उसके होंठ खुले…शब्द जैसे बाहर आने को तैयार थे।तभी सृष्टि की धीमी लेकिन ठहरी हुई आवाज़ आई—मुझे कोई बात नहीं सुननी…Please… मुझे सोने दीजिए।Disturb मत कीजिए...

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जीवन की नई डोर - भाग 1 By prem chand hembram

दीक्षा — भाग १ अंधकार से प्रथम परिचयधनबाद जिले की कोयला नगरी के समीप बंगालियों की एक बड़ी कॉलोनी थी।उसके चारों ओर टीन, प्लास्टिक और खपरैल से बने कई झोपड़ीनुमा घर बिखरे पड़े थे।सुबह...

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Counterfeit Coin By Alok Mishra

        Evening was falling. The chill in the air was sharp, the winds howling fiercely. Drawn by a craving for a cigarette, Ashok left his room at Ashok Lodge and wandered down to...

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रंग माझा वेगळा - 3 By manasvi Manu

भाग तीन " एक मिनिट ... माझं आधी ऐकून घ्या आणि मग तुमचा जो निर्णय असेल मला मान्य असेल ... please .  बसा . " सरिता पुन्हा वळली तिने सागर कडे बघितलं . तिला त्याच्या डोळ्यात काहीतरी जा...

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बिल्ली जो इंसान बनती थी - 21 By Sonam Brijwasi

तांत्रिक जैसे ही तलवार शानवी की ओर उठाने वाला था…पूरा कमरा सन्न हो गया। लेकिन तभी—एक तेज़, गूंजती हुई आवाज़ आई—रुक जाओ!सभी की नज़र पीछे मुड़ी। दरवाज़े पर खड़ा था… कार्तिकेय। उसकी...

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आर्या ( भाग १५ ) By suchitra gaikwad Sadawarte

     ( पाच वर्षानंतर )    सकाळी सकाळी श्वेता ची आवराआवर चालू असते. आठ वाजले असतात , ती जोरजोरात अनुराग ... अनुराग.. अनुराग अरे...उठा रे! किती रोज रोज त्रास देता मला तुम्ही तिघे ! प...

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खोंटा सिक्का By Alok Mishra

शाम हो रही थी। ठंड़ी हवाऐं बहुत तेज बह रहीं थी। ऐसे में अशोक लाज का कमरा छोड़ कर सिगरेट की तलब में नीचे चौराहे पर गुमटी तक आया। एक सिगरेट जला कर खुद को हलका और गर्म महसूस करने लगा।...

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दो पतियों की लाडली पत्नी - 24 By Sonam Brijwasi

Shreya सोफे पर अकेली बैठी थी।उसके चेहरे पर आँसू सूखते-सूखते फिर बह जाते।कमरा पहले जैसा नहीं था…ना वही गर्माहट, ना वही हँसी।तभी—उसके फोन पर एक टन की आवाज़ आई।वह चौंककर उठी।फोन में उ...

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तपती दोपहरी By prem chand hembram

तपती दोपहरी बैसाख की तपती दोपहरी…आसमान से आग बरस रही थी।ऐसा समय, जब लोग घर से बाहर निकलने से भी कतराते हैं।पुराने बाज़ार के एक कोने में राजू अपनी रिक्शा लेकर खड़ा था।सामने सत्तू की...

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સ્ત્રી અને સમાજ આધુનિક યુગ ની સંઘર્ષ ગાથા - 6 By Komal L

Chapter 6 social media નો દુરુપયોગ કરતી સ્ત્રીઓસોશિયલ મીડિયા આજે સ્ત્રીઓ માટે સૌથી મોટું સશક્તિકરણનુંસાધન છે, પરંતુ તે જ સમયે તેનો દુરુપયોગ પણ સ્ત્રીઓ જ કરી રહી છે – અને તેનુંપ્રમા...

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“त्या चार वर्षांच्या चिमुकलीसाठी…”आज शब्दही थरथरतात… कारण ही फक्त एक बातमी नाही, ही एका निष्पाप जीवाची निःशब्द किंकाळी आहे. चार वर्षांची ती मुलगी… जिने अजून आयुष्याच्या पानांवर पहि...

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ममता ...एक अनुभूति... - 5 By kalpita

थकान और कमजोरी से लड़की की  आँखें भारी होने लगीं। नींद और बेहोशी के बीच  बड़बड़ाई—“माता रानी… मैंने कभी किसी माँ की झोली खाली करने का इरादा नहीं किया था… सुनीता पर दया करो… उसकी ममत...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 41 (अंतिम भाग) By Jyoti Prajapati

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આહુતિ ની પરાકાષ્ઠા By Urmi Sonagara

આ એવી આહુતિ છે જેમાં બધું હોમાય તો જાય અને પછી ધુવાડો થાય તો પણ છેલ્લે આહુતિ નો જ દોષ કાઢવામાં આવે છે , એવું વક્તિવ જેના વગર આ સૃષ્ટી આધુરી છે .એક સ્ત્રી જેને તેની આખી જિંદગી માં મ...

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ગુજરાતી લોકગીત - ભાગ 1 By Mansi Desai Shastri

લોકગીત 1 નણદલ માગે લહેરિયું.મારા લહેરિયામાં લાગી લુંટાલૂટ હો. નણદલ માગે લહેરિયું રે બાઈ!મારા દાદાનું દીધેલું લહેરિયું રે બાઈ। મારી માતાની બાંધેલ લાંક હો. નણદલ માગે લહેરિયું રે બાઈ!...

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सपनों की डोली। - 5 By softrebel

__मौन के पार से आई खबर___बच्चों के मन में उत्पन्न सवालों को नारायणी अक्सर इधर उधर की बातें कर टालने का प्रयास करती।नारायण के बिन पहले कुछ दिन बीते, फिर सप्ताह और महीने...धीरे-धीरे...

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