आज मृदुला कुछ अलग ही अंदाज़ में सजी हुई थी। गहरे हरे रंग की सिल्क की साड़ी, माथे पर लाल बिंदिया और जूड़े में लगे सफेद मोगरे के फूल—सब मिलकर उसके भीतर उमड़ते रोमांच को प्रकट कर रहे थे। लगभग एक साल बाद अभिनव घर लौट रहा था।विवाह के दस दिन के भीतर ही अभिनव अपनी पोस्टिंग पर चला गया था। मेहमानों और रीति-रिवाजों के बीच समय ऐसे निकल गया कि इन दोनों के शर्म के बोल भी न खुल पाए थे। आज मृदुला की आँखों में एक अनकही-सी बेचैनी थी…
ख़ाकी बिंदिया - भाग 1
आज मृदुला कुछ अलग ही अंदाज़ में सजी हुई थी। गहरे हरे रंग की सिल्क की साड़ी, माथे पर बिंदिया और जूड़े में लगे सफेद मोगरे के फूल—सब मिलकर उसके भीतर उमड़ते रोमांच को प्रकट कर रहे थे। लगभग एक साल बाद अभिनव घर लौट रहा था।विवाह के दस दिन के भीतर ही अभिनव अपनी पोस्टिंग पर चला गया था। मेहमानों और रीति-रिवाजों के बीच समय ऐसे निकल गया कि इन दोनों के शर्म के बोल भी न खुल पाए थे। आज मृदुला की आँखों में एक अनकही-सी बेचैनी थी…सभी ड्राइंग रूम में बैठे बार-बार दरवाज़े की ओर देख ...Read More